"क्योंकि पाप की मजदूरी तो मृत्यु है, परन्तु परमेश्वर का वरदान हमारे प्रभु मसीह यीशु में अनन्त जीवन है।" — रोमियों 6:23 (BSI)
पौलुस दो आत्मिक व्यवस्थाओं के बीच एक स्पष्ट अंतर दिखाता है: "मजदूरी" बनाम "वरदान"। मजदूरी वह है जो आप अपने काम और प्रयास से कमाते हैं। मानव स्वभाव में, पाप की कमाई केवल आत्मिक मृत्यु है। इसके विपरीत, अनंत जीवन को मानवीय प्रयासों या धार्मिकता के माध्यम से कमाया नहीं जा सकता। इसे परमेश्वर का एक "वरदान" कहा गया है। वरदान पाने के लिए आपको मजदूरी नहीं करनी पड़ती; आप बस अपने हाथ खोलते हैं और धन्यवाद के साथ इसे स्वीकार करते हैं। यह अनंत जीवन केवल जीवन की अवधि नहीं है, बल्कि स्वयं परमेश्वर का जीवन है जो मसीह यीशु के द्वारा आपके भीतर निवास करता है। उद्धार पूरी तरह से परमेश्वर के अनुग्रह का कार्य है।