"अब प्रतिज्ञाएँ अब्राहम को और उसके वंश को दी गईं। वह यह नहीं कहता, 'वंशों को,' जैसे बहुतों के विषय में, परन्तु जैसे एक के विषय में, 'और तेरे वंश को,' जो मसीह है।" (गलातियों 3:16, BSI)
हर भारतीय परिवार जानता है कि ज़मीन के काग़ज़ पर एक नाम की कितनी ताक़त होती है। ज़मीन बड़ी हो सकती है। परिवार उससे भी बड़ा। पर काग़ज़ पर एक ही व्यक्ति का नाम होता है। पौलुस अब्राहम से किए परमेश्वर के वादे को ऐसे ही पढ़ता है। परमेश्वर ने कहा, "तेरे और तेरे वंश को" (उत्पत्ति 12:7)। पौलुस उस छोटे शब्द की ओर ध्यान दिलाता है। वह वंश है, वंशों नहीं। और वह बताता है कि वह एक वंश कौन है। "एक के विषय में, जो मसीह है।" इससे पूरी कहानी बदल जाती है। यहूदी लोग जन्म से अब्राहम की संतान होने पर गर्व करते थे, और उसके लिए आभारी होना ठीक भी था। पर प्रतिज्ञा कभी रक्त-संबंध पर रुकने के लिए नहीं थी। वह हमेशा एक व्यक्ति की ओर इशारा कर रही थी। इसलिए आशीष किसी जाति की मेहनत से नहीं आई। वह मसीह के द्वारा आई।