"इसलिये जब हमारा ऐसा बड़ा महायाजक है, जो स्वर्गों से होकर गया है, अर्थात् परमेश्वर का पुत्र यीशु, तो आओ, हम अपने अंगीकार को दृढ़ता से थामे रहें।" (इब्रानियों 4:14, BSI)
पुराने ढंग के सरकारी दफ़्तर की सोचो। तुम टोकन लेते हो। इंतज़ार करते हो। उम्मीद करते हो कि आज सही आदमी मेज़ पर होगा। पुरानी व्यवस्था में परमेश्वर के पास आने में कुछ ऐसा ही एहसास था। याजक तुम्हारे और उसके बीच खड़े होते थे। एक आदमी, महायाजक, साल में एक बार लहू लेकर भीतरी कोठरी में जाता था। बाक़ी सब बाहर इंतज़ार करते थे। याजकों को बदलना भी पड़ता था, क्योंकि वे मर जाते थे (इब्रानियों 7:23)। अब पद फिर पढ़ो। हमारा महायाजक "स्वर्गों से होकर गया है।" वह किसी इमारत में परदे के पीछे नहीं है। वह पूरी तरह भीतर गया। और वह "परमेश्वर का पुत्र यीशु" है। वह कोई विकल्प नहीं है। वह पुत्र है। इसीलिए पुरानी मन्दिर-व्यवस्था हट सकी। वह इसकी छाया थी। जब असली महायाजक आ गया, तब छाया को रहने की ज़रूरत नहीं थी। सन् 70 तक वह चली गई।