"उसके लिये द्वारपाल द्वार खोल देता है, और भेड़ें उसका शब्द सुनती हैं; और वह अपनी भेड़ों को नाम ले लेकर बुलाता है और बाहर ले जाता है।" (यूहन्ना 10:3, BSI) "अच्छा चरवाहा मैं हूँ; मैं अपनी भेड़ों को जानता हूँ, और मेरी भेड़ें मुझे जानती हैं।" (यूहन्ना 10:14, BSI)
शाम 6 बजे की भीड़ भरी रेलवे प्लेटफ़ॉर्म की तस्वीर सोचो। हज़ारों आवाज़ें। घोषणाएँ। फेरीवाले। फिर उन सबके ऊपर एक आवाज़ तुम्हारा नाम लेती है। तुम तुरंत मुड़ते हो। यीशु की तस्वीर यही है। "वह अपनी भेड़ों को नाम ले लेकर बुलाता है।" "ऐ तुम" नहीं। तुम्हारा नाम। और "भेड़ें उसका शब्द सुनती हैं।" संदर्भ देखो। यीशु उन लोगों से बात कर रहा है जो इस्राएल के चरवाहों को जानते थे। उनमें से बहुत से अगुवे झुंड के साथ असफल हुए थे। परमेश्वर ने यहेजकेल के द्वारा यह कहा था (यहेजकेल 34)। भेड़ें बिखरी और भूखी थीं। यीशु आगे आता है और कहता है, "अच्छा चरवाहा मैं हूँ।" पुराना भेड़शाला व्यवस्था थी, पुरानी व्यवस्था के नीचे एक सुरक्षित आँगन। वह झुंड को सँभालता था, पर उसे खिला नहीं सकता था। यीशु उन्हें "बाहर ले जाता है।" वह उन्हें बाड़े में नहीं रखता।