राज्य तुम्हारी थाली में नहीं है — हिन्दी | Apostolic Wisdom Daily Manna

"क्योंकि परमेश्वर का राज्य खाना-पीना नहीं, परन्तु धार्मिकता और मेल-मिलाप और वह आनन्द है जो पवित्र आत्मा से होता है।" (रोमियों 14:17, BSI)

हर भारतीय शादी में एक ही चुपचाप बहस होती है। शाकाहारी या मांसाहारी? कौन कहाँ बैठेगा? पहले कौन खाएगा? लोग वचनों से ज़्यादा खाना याद रखते हैं। पौलुस रोम के उन विश्वासियों को लिख रहा है जो ऐसे ही बहस कर रहे थे। कुछ यहूदी विश्वासी अब भी पुराने भोजन-नियम और ख़ास दिन मानते थे। दूसरे कहते थे कि इन बातों का अब कोई महत्त्व नहीं। दोनों पक्ष अपने को सही मानते थे, और दोनों एक-दूसरे को दोषी ठहरा रहे थे। पौलुस इसे चीर देता है। "परमेश्वर का राज्य खाना-पीना नहीं है।" भोजन और दिन छाया का हिस्सा थे। कुलुस्सियों में भी यही है: वे "आनेवाली बातों की छाया हैं, पर मूल वस्तु मसीह की है" (कुलुस्सियों 2:17)। तो राज्य क्या है? तीन बातें। धार्मिकता, मसीह में तुम्हें दी गई सही स्थिति। मेल-मिलाप, परमेश्वर से युद्ध का अन्त (रोमियों 5:1)। और आनन्द, सब "पवित्र आत्मा में।