तुम्हारा जीवन कौन जी रहा है? — हिन्दी | Apostolic Wisdom Daily Manna

"मैं मसीह के साथ क्रूस पर चढ़ाया गया हूँ, और अब मैं जीवित न रहा, पर मसीह मुझ में जीवित है; और मैं शरीर में अब जो जीवित हूँ तो केवल परमेश्वर के पुत्र के विश्वास से जीवित हूँ, जिसने मुझसे प्रेम किया और मेरे लिये अपने आप को दे दिया।" (गलातियों 2:20)

एक फ़ोन लो और उसमें नया सिम डालो। वही फ़ोन, वही शरीर, वही स्क्रीन। पर नंबर, नेटवर्क और पूरी लाइन नई है। पौलुस कुछ ऐसा ही कह रहा है। वह अब भी चल-फिर रहा है। "मैं शरीर में अब जो जीवित हूँ।" पर उसे कौन जी रहा है? "मैं नहीं, मसीह मुझ में जीवित है।" ध्यान दो कि वह क्या नहीं कहता। वह यह नहीं कहता, "मैं मसीह के जीवन की नक़ल करने की कोशिश करता हूँ।" वह कहता है कि मसीह मुझ में जीवित है। मसीही जीवन यीशु जैसा बनने की मेरी भरसक कोशिश नहीं है। वह यीशु का मेरे द्वारा जीना है। अब आख़िरी हिस्सा देखो। हम में से बहुत लोग इसे परमेश्वर के पुत्र पर विश्वास पढ़ते हैं। पर पौलुस कहता है परमेश्वर के पुत्र का विश्वास। ये दोनों एक बात नहीं हैं। उस पर विश्वास वही है जिसकी ओर ज़्यादातर लोग हाथ बढ़ाते हैं।