"क्योंकि मेरे लिये जीवित रहना मसीह है, और मर जाना लाभ है।" (फिलिप्पियों 1:21)
हम में से ज़्यादातर यीशु को फ़ोन के एक ऐप की तरह रखते हैं। एक अच्छा ऐप, शायद सबसे अच्छा। पर वह कैमरे, मैप और मैसेज के बग़ल में रहता है। हम उसे तब खोलते हैं जब ज़रूरत हो। पौलुस ऐसे नहीं बोलता। "जीवित रहना मसीह है।" यह नहीं कि "मेरा जीवन और मसीह।" यह नहीं कि "मसीह मेरे जीवन का एक हिस्सा है।" मसीह ही जीवन है। बाक़ी सब वह स्क्रीन है जिस पर वह चलता है। ध्यान दो कि पौलुस ने यह कहाँ लिखा। वह क़ैद में है, ज़ंजीरों में, एक ऐसे फ़ैसले की प्रतीक्षा में जो उसकी जान ले सकता है। अगर किसी के पास घबराने का कारण था, तो उसी के पास। फिर भी वह शांत है, क्योंकि उसका जीवन परिस्थितियों से बँधा नहीं है। वह एक व्यक्ति से बँधा है। अगर जीवित रहा, तो मसीह को जिएगा।